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Tuesday, June 7, 2011

जिदंगी आसान भी बन सकती है- सांई साधराम






संत श्री का सीहोर में जोरदार स्वागत
सीहोर। मनुष्य तमाम प्रकार की उलझनों में जी रहा है ऐसा नहीं है कि उसकी जिंदगी आसान नहीं बन सकती है पर मनुष्य उस रास्ते पर चलने का प्रयास नहीं कर रहा है। इसके लिए मनुष्य को अपने जीवन में से असत्य का निकालना होगा यदि वो ऐसा कर लेता है तो उसकी राह में कांटे आएंगे ही नहीं। यह बात सोमवार की रात को टाउन हाल में एसएसडी मंडल, सखी बाबा आसूदाराम सेवा समिति तथा सिंधी समाज के सत्संग कार्यक्रम में रहड़की के संत सांई साधराम साहिब ने उपस्थित जनसमूह से कही।
सांई साधराम साहिब ने कहा कि यदि हमारी जिंदगी से असत्य निकल जाता है तो जिदंगी आसान बन जाती है क्योंकि एक असत्य कई प्रकार के पाप कराता जाता है और हमें उसका पता ही नहीं चलता कि हमने अपनी जिदंगी गलत राह की ओर मोड़ दी है। उन्होंने कहा कि सत्य को कभी याद रखने की जरुरत नहीं रहती जबकि असत्य बार याद रखने के चक्कर में गलती पर गलती कराता रहता है। संतश्री ने कहा कि हम जिस बात को कर रहे है अथवा कह रहे है उस पर अमल करने का प्रयास भी करे तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है आम तौर पर देखा जाता है कि आदमी समझा तो काफी बेहतर तरीके से लेता है पर जब उस पर अमल करने की बारी आती है तो वह फेल हो जाता है हमें ऐसी परिस्थितियों से बचना होगा। उन्होंने कहा कि हमे सदैव अपने अवगुणों को त्यागने के लिए तत्पर रहना होगा तभी प्रभु प्राप्ति की ओर हमारे कदम अग्रसर होंगे। इससे पहले संतश्री ने सांई सतरामदास जी एवं अमरशहीद संत कंवर राम साहिब के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में नपा अध्य नरेश मेवाड़ा सहित सिंधी समाज के लोगों सहित अन्य समाज के लोगों ने भागीदारी कर दर्शन लाभ प्राप्त किए।

Saturday, June 4, 2011

संत श्री का आगमन सोमवार को

सीहोर। युवा संत हजूरी रुप सांई साधराम साहिब का शुभआगमन सीहोर में सोमवार को होने जा रहा है। उनके आगमन की सूचना से लोगों में अपार उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। संत श्री के स्वागत के लिए जोरदार तैयारियां की जा रही है। इस अवसर पर सीहोर के अलावा भोपाल, इंदौर, देवास तथा आष्टा से भी श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। एसएसडी मंडल, संत सखी बाबा आसुदाराम सेवा समिति और सिंधी समाज के सदस्यों ने बताया कि रहड़की के संत सांई सतराम दास जी के गादीसर युवा संत सांई साधराम साहिब 6 जून सोमवार की रात साढ़े नौ बजे सीहोर पधार रहे है। संतश्री राजधानी भोपाल के कार्यक्रम में शरीक होने के बाद सीहोर के कार्यक्रम में शरीक होकर लोगों के दर्शन देेंगे। संतश्री प्रवचन के उपरांत लोगों के कष्टों को दूर करने के लिए भी उपाय बताएंगे जिसका लाभ प्राप्त करने के लिए सीहोर के अलावा   अलावा भोपाल, इंदौर, देवास तथा आष्टा से भी श्रद्धालुजन के आने की संभावना है।  स्थानीय बस स्टैंड के समीप टाउन हाल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। संत श्री सीहोर में कार्यक्रम में शरीक होने के बाद 7 और 8 जून को इंदौर तथा 9 जून को उजैन तथा 10 जून को देवास में कार्यक्रम में शामिल होंगे।  संत श्री के आगमन को लेकर सिंधी समाज के लोगों में व्यापक उत्साह का वातावरण देखा जारहा है। एसएसडी मंडल, संत सखी बाबा आसुदाराम सेवा समिति और सिंधी समाज के सदस्यों ने  सभी धर्म प्रेमी जनता से संतश्री के श्री मुख से बहने वाली ज्ञान गंगा का आनंद प्राप्त करने की अपील की है। 

Friday, June 3, 2011

एक साल में ही दूसरा संस्करण प्रकाशित

 प्रकाशन के पहले ही आधी किताब बुक 
सीहोर। भारतीय ज्ञान पीठ नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित लेखक पंकज पुरोहित सुबीर का उपान्यास ये वो सहर तो नहीं... का दूसरा संस्करण भारतीय ज्ञान पीठ  ने प्रकाशित कर दिया है। किसी युवा लेखक के लिए यह पहला अवसर है कि जब एक साल के भीतर ही उसकी उपान्यास का दूसरा संस्करण प्रकाशित किया गया है। इसके अलावा एक विशेष बात यह भी है कि दूसरे संस्करण के प्रकाशन के पहले ही आधी उपान्यास पहले से बुक है। ज्ञातव्य है कि शहर के साहित्यकार पंकज पुरोहित सुबीर की उपान्यास ये वो सहर तो नहीं... का प्रकाशन भारतीय ज्ञान पीठ  ने कर उन्हें भारतीय ज्ञान पीठ के नवलेखन पुरस्कार से वर्ष 2010 से नवाजा था। देश की राजधानी में उन्हें यह पुरस्कार एक भव्य और गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया था। पंकज सुबीर का यह उपान्यास पूरे देश में चाव के साथ पढ़ा गया तथा देश के नाम चीन साहित्यकारों ने सराहना की है। लेखक ने सन् 1857 के क्रांतिकारी $गदर और सन् 2007 के प्रशासनिक $गदर को जिस खूबी से बखान किया उसकी देश भर में व्यापक स्तर पर सराहना की गई। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर आम और खास ने पंकज सुबीर की उपान्यास की सराहना की, उपान्यास की डिमांड  बढऩे पर भारतीय ज्ञान पीठ ने एक साल के भीतर ही इसका दूसरा संस्करण प्रकाशित किया है। यह पहला अवसर है जब किसी युवा लेखक के उपान्यास का मात्र एक वर्ष के भीतर ही दूसरा संस्करण प्रकाशित किया गया हो, दूसरा संस्करण प्रकाशन के पहले उसकी आधी प्रतियां बुक हो चुकी है।

Wednesday, June 1, 2011

सीहोर एक्‍सप्रेस का 1 जून का अंक पढ़ने के लिये नीचे तस्‍वीर पर क्लिक करें

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Wednesday, May 25, 2011

सीहोर एक्‍सप्रेस का 25 मई का अंक पढ़ने के लिये नीचे चित्र पर क्लिक करें

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Thursday, May 19, 2011

रिर्जेवेशन आधा दिन होने के कारण यात्रियों को होना पड़ता है परेशान

 अभी भी भोपाल पर निर्भरतासीहोर। ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन पर सुविधा प्राप्त होने के बाद भी राजधानी पर निर्भर होना पड़ रहा है। जिसके कारण न केवल लोगों का समय खराब हो रहा है बल्कि उनको आर्थिक रुप से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस समय शादी का सीजन प्रारंभ हो चुका है जिसका असर चारो तरफ नजर आने लगा है, मई और जून माह में शादियों की अधिकता के कारण बाजार में रौनक ओर भी बढ़ेगी, शादियों की अधिकता का असर सबसे अधिक प्रभाव ट्रेन रिर्जेवेशन कांउटर पर नजर आ रहा है। अभी से विभिन्न ट्रेनों की रिर्जेवेशन मिलना मुश्किल कार्य हो रहा है। रेलवे स्टेशन पर अन्य दिनों की तुलना में रिर्जेवेशन कांउटर पर काफी भीड़ नजर आ रही है, रिर्जेवेशन कराने के लिए अधिकृत समय कम होने के कारण लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीहोर में दोपहर में तीन बजे तक ही रिर्जेवेशन हो पाते है पहले यह समय दोपहर दो बजे तक ही था जिसे बढ़ाकर तीन बजे तक किया गया जबकि अन्य शहरों में यह समय रात आठ बजे और रात दस बजे तक का है, ऐसे में सीहोर में रिर्जेवेशन कराने के लिए केवल आधा दिन होने के कारण अभी भी भोपाल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। दोपहर तीन बजे तक तो फिर भी रिर्जेवेशन हो जाते है पर उसके बाद यदि उसे कैंसिल करवाना होते है तो यात्रियों को भोपाल ही जाना पड़ता है जिससे कारण उन्हें आर्थिक रुप से नुकसान उठाना पड़ता है, लोगों का कहना है कि सीजन के समय तो विभाग को रिर्जेवेशन कांउटर का समय बढ़ाकर कम से कम रात आठ बजे किया जाना चाहिए।

Wednesday, May 18, 2011

बाबा रामदेव आएंगे

सीहोर। जिला पतजंलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान न्यास की आवश्यक बैठक गत दिवस संपन्न हुई। जिसमें योगाचार्य बाबा रामदेव के आगमन की तैयारियों की समीक्षा की जाकर कार्य सौंपे गए। पतजंलि योग समिति मीडिया प्रभारी संतोष सिंह ने बताया कि योगाचार्य स्वामी रामदेव के आगामी 31 मई को आवासीय खेलकूद विद्यालय ग्राउंड पर आयोजित होने वाले नि:शुल्क शिविर की तैयारियां की जा रही है। आवासीय खेलकूद विद्यालय मैदान पर सुबह पांच बजे से साढ़े सात बजे तक बाबा रामदेव लोगों को योग का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस दौरान हरिद्धार से आए चिकित्सकों द्वारा भी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। यहां पर विभिन्न स्टाल लगाए जाएंगे।

Tuesday, May 17, 2011

बेमौसम रुठों को मनाए जाने की कवायद

सीहोर। वैसे तो रूठों को मनाने की कवायद का सबसे सही मौसम चुनाव होते हैं लेकिन बेमौसम जब बारिश हो सकती है तो रूठों को क्यों नहीं मनाया जा सकता। दरअसल कांग्रेस में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद जिले में भी परिवर्तन को आवश्यक माना जा रहा है। इसी के चलते पुराने कांग्रेसी नई साज सज्जा कर स्वयं के लाइम लाइट में आ जाने को लेकर आश्वस्त हैं और इसी के चलते वह उन रूठों को मनाने में लगे हुए हैं जिन्हें उन्होंने कभी ना कभी कोई दर्द दिया था। इसे माने तो वह कहावत ही पुरानी नजर आती है कि तुम्ही ने दर्द दिया है दवा भी तुम्ही देना। अब तो यह कहा जाना चाहिए कि तुम्हें तो दर्द दिया था हमने अब दवा ऐसी दो कि ताज अपने ही सिर सजे और वह भी आपके ही सहयोग से।
एक नजर इधर भी ....बात जब रूठों को मनाने की चल ही रही है तो भाजपा भी इस काम में पीछे नहीं है। लेकिन भाजपा में रूठों को मनाने की कवायद प्रदेश की राजधानी में चल रही है लेकिन इन रूठों की सूची में सीहोर के नाम भी प्रमुखता से शामिल हैं। बस इन रूठों को मनाने का जिम्मा स्थानीय पदाधिकारियों को मिलने वाला है। यह वह रूठे हैं जो लगभग छह साल पहले दीदी के चक्कर में भाजपा का दामन छोड़ गए थे। हालांकि इस सूची में सबसे ऊपर भाजपा उनका नाम है जो कभी दीदी के खासों की गिनती में आते हैं। यह भी भाजपा में सम्मानजनक वापसी के इच्छुक हैं। सवाल उठता है कि क्या रघुनंदन शर्मा की तरह या प्रहलाद पटेल की तरह?
इंतजार तो इन्हें भी है....नगर पालिका चुनाव में किसी ने कुछ पाया तो किसी ने कुछ खोया। इसी चुनाव ने उन नेताओं की आशाओं पर भी तुषारापात किया था जो ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे। क्या कहें भैया किस्मत भी एक ऐसी चीज ऊपर वाले ने बनाई है जो साथ दे तो वाह और साथ छोड़ दे तो आह ही मुंह से निकलती है। ऐसा ही वाकया ब्लाक कांग्रेस पद पर आसीन होने की उम्मीद लगाए नेताओं के साथ घटा है। अब नपा चुनाव के बाद बंधी आस की डोर प्रदेश नेतृत्व में हुए बदलाव ने खींच दी। जानकार मानते हैं कि पहले प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार होगा और बाद में जिले में नई नियुक्ति होगी इसके बाद ही खाली ब्लाक अध्यक्ष पद की शोभा बढ़ाने के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन किया जाएगा। यह तो बातें हैं बातों का क्या...? देखते हैं आगे आगे होता है क्या?
खुसुर फुसुर शुरू ....चुनावों के दौर से निपटने के बाद राहत की सांस भी ठीक से नहीं ले पाए प्रशासनिक अमले के सामने जनगणना करने की चुनौती आ गई। शिक्षा विभाग के अमले ने इस चुनौती से निपटकर परीक्षाएं कराई तो अब मंडी के चुनाव नजदीक बताए जा रहे हैं। तारीख की घोषणा भर होना बाकी है। इसी आधार पर जिले की मंडियों के अध्यक्ष पदों से लेकर संचालक बनने वालों की जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। पहले संपन्न हुई मंडी चुनाव की कार्रवाई ने जितने लोगों के दिलों में इच्छाएं जगाई थी अब उन इच्छाओं ने अपना ठिकाना बदल लिया है यानी कि अब वही इच्छाएं दूसरे दिलों में धड़क रही हैं। खासकर इच्छाओं ने ही कानों कान खुसुर पुसुर शुरू की है। इस खुसुर पुसुर से भी जानकार संभावित उम्मीदवारों के नामों के टोह ले रहे हैं। फिर भी नामांकन जमा करने वालों की में शामिल होने वाले नाम ही अंतिम कहे जाएंगे। लेकिन अनुमान के घोड़े दौड़ाए जाना भी तो जरूरी हैं।
राजनीति भारी साबित हुई  भारत जैसे धर्म प्राण देश में धर्म के आगे सब कुछ बौना नजर आता है। खासकर जिस देश की राजनीति भी धर्म के आधार पर चलती हो वहां राजनीति का धर्म पर भारी साबित होना किसी अजूबे जैसा लगता है। ऐसा ही अपवाद जिला मुख्यालय पर घटित हुआ।
१८५७ में आजादी की पहली लड़ाई हो या १९४७ में देश के बंटवारे की बात या फिर आजाद देश में १९८९ में धर्म के आधार पर कांग्रेस को सत्ता से दूर करने में मिली सफलता हो। धर्म हर क्रांति या बदलाव का आधार बना है। जब धर्म पर राजनीति भारी नजर आने लगे तो जानकारों का चौंकाना स्वभाविक है। वाकया कुछ इस प्रकार घटा कि एक ओर राजनीति हल्कों में जिले के गौरव कहे जाने वाले प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का नगर आगमन हुआ तो दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय संत के रूप में सुविख्यात आसाराम बापू का नगर में प्रवेश हुआ। संयोग की बात यह है कि दोनो हस्तियों का नगर में प्रवेश लगभग एक ही समय में हुआ। प्रदेश के मुखिया का जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद सातवां  दौरा था तो संत श्री का नगर में द्वितीय आगमन।
दोनों के मंच के सामने उपस्थित होने वाले जनसमुदाय की संख्या का अनुमान लगाएं तो संत के दर्शन करने वालों में महज डेढ़ दो सौ लोगों का समूह एकत्रित रहा लेकिन शिवराज की सभा सुनने वालों की संख्या हजारों में रही। जनसमूह की संख्या ने ही इस चर्चा को जन्म दिया कि राजनीति धर्म पर भारी नजर आ रही है। लेकिन तर्क देने वालों की भी कमी नहीं है जिन्होंने यह बताया कि सीएम की स्वागत की अपील करने वालों ने प्रचार प्रसार के मामले में संत श्री के अनुयायियों को पीछे छोड़ दिया था इस कारण भीड़ का अंतर नजर आया। मामले में एक तर्क यह भी चर्चा में रहा कि जितने लोग सीएम को सुनने गए थे सभी के पास यह भी सूचना थी कि संत आसाराम जी भी आज नगर में आ रहे हैं। पुलिस के वायरलेस पर चल रहे संदेश तो यही गवाही देते हैं। खैर बात है राजनीति के धर्म पर भारी होने की तो एक झलक यह भी देखें। सीएम अपनी सभा के दौरान जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांगों पर शासन के खजाने का मुंह खोल कर विकास की नई इबारत लिखे जाने की घोषणाओं पर घोषणाएं कर रहे थे तो शायद इतनी तालियां नहीं सुनाई दे रही थी जितनी हर्ष की किलकारियां संत श्री के आशीर्वाद मिलने पर बापू श्री के कार्यक्रम में सुनाई दे रही थी।जहां वह अपने हाथ से कुछ सामग्री भक्तों के बीच वितरण कर रहे थे और हर भक्त अपने को धन्य महसूस कर रहा था।  इस वाकये से इस बात को बल मिलता है के अभी भी धर्म ही राजनीति पर भारी है लेकिन दोनों आयोजनों में एकत्रित जनसमूह इस बात को बता रहा है कि राजनीति धर्म पर भारी होने लगी है।

Monday, May 16, 2011

इधर मुख्यमंत्री गए उधर डम्फर भी चला गया

सीहोर। पिछले पन्द्रह सालों से उपेक्षित पड़ी सड़क को बनाने का कार्य होली के पहले जब प्रारंभ होने लगा तो लोगों के चेहरों पर खुशियों का वातावरण देखा गया पर उन्हें इस बात की भी उम्मीद नहीं थी कि यह सड़क खुशियां कम परेशानियां अधिक प्रदान करेगी। धीरे-धीरे करके सड़क का कार्य छूटे हुए करीब दो माह का ही समय होने का आया है। इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री आभार प्रदर्शन करने के लिए सीहोर पधारे तो अचानक लोगों के चेहरों पर फिर से खुशियों की चमक दिखाई देने लगी और ठेकेदार द्वारा अचानक डम्फर पर डम्फर कार्य करने के लिए जुटा दिए गए जिससे लोगोंं का लगा कि अब कार्य निपट जाएगा। पहले तो मुख्यमंत्री का इस रोड से निकलना ही तय नहीं था पर जैसे ही उनका इस रोड से आना तय हुआ कार्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर दिया गया उनके आने का इतना फायदा हुआ कि पूरे रास्ते में दोनों तरफ मार्ग चौड़ा करने के लिए जो नालियां खोद दी गई थी वो न केवल दुकानदारों के लिए बल्कि यहां से निकलने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी उसे ताबड़तोड़ में भरवा दिया गया जिस प्रकार से मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना को लेकर कार्य की गति प्रारंभ हुई थी उससे यही लग रहा था कि इस बार कार्य पूरा होकर स्थायी राहत मिलेगी पर ऐसा हुआ नहीं इधर मुख्यमंत्री का राजधानी की ओर प्रस्थान हुआ नहीं कि उधर ठेकेदार द्वारा अपने डम्फर तुरंत ही दूसरी साइड पर भेज दिए गए जिससे जो उम्मीद बंधी थी वो टूटकर रह गई लोगों में एक बार फिर निराशा के भाव देखे जा रहे है अभी यह कोई बताने वाला नहीं है कि सड़क का निर्माण कब तक और किस प्रकार से पुन: प्रारंभ होगा। जिस प्रकार से कार्य की गति चल रही है उससे लोगों के माथे पर इस बात की भी चिंता की लकीरे देखी जा रही है कि यदि बरसात के पहले सड़क का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो बारिश से उत्पन्न होने वाली मुसीबतों से भी निपटना आसान नहीं होगा।
सीवन अभियान फिर फिस्सजिस प्रकार से सीवन नदी की सफाई को लेकर एक बार फिर चिंता प्रकट की जाकर श्रेय लेना का प्रयास प्रारंभ किया गया था उससे लगने लगा था कि इस बार कार्य काफी अच्छा चलने की संभावना थी पर जैसा कि हर बार होता आया है कि श्रेय लेने के चक्कर में ही सीवन को कभी जीवन नहीं मिला है श्रेय लेने वाले लोगों द्वारा अपना अभियान केवल फोटो खींचने और वाही वाही लेने तक ही सीमित रहता है यही कारण है कि सीवन को जीवन मिलने के पहले ही उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगता है इस बार जिस प्रकार से प्रयास किए गए थे उससे लगता नहीं था कि सीवन का कार्य गति नहीं पकड़ पाएगा पर हुआ वही जो हर बार होता है। खैर जिन्होंने भी सीवन को जीवन देने का संकल्प लिया है और दिलवाया है उनके पास अभी भी आधी मई और आधा जून पड़ा है वो इस दौरान वाकई कार्य कर और करवाकर  अपनी वजनदारी को साबित कर सकते है ताकि बारिश के दौरान तो नदी लबालब बनी रहे ताकि लोगों को कुछ राहत मिले, बरहाल देखना यह है कि यह सीवन का अभियान प्रचार प्रसार से दूर रहकर कुछ गति भी पकड़ पाता है या फिर अगले साल एक बार फिर श्रेय लेने के अभियान का इंतजार किया जाएगा। 
कार्रवाई की रस्म अदायगी पूरा शहर पीने के पानी की समस्या से जूझता हुआ नजर आ रहा है ऐसे में मकान निर्माण के कार्य लोगों को हैरान परेशान किए हुए है, लगातार जब मीडिया द्वारा ध्यान आकृष्ट कराया गया तो कुछ लोगों के यहां पर कार्रवाई कर उन लोगों के मकान पर जप्ती की कार्रवाई की गई उसे मात्र रस्म अदायगी माना जाए तो शायद अतिश्योक्तिपूर्ण ही माना जाएगा क्योंकि जहां जहां पर भी यह कार्रवाई की गई उसके आसपास भी मकान बनने का सिलसिला बिना किसी रोकटोक के चलता रहा कई मकानों पर तो बड़ी बड़ी छत भी डलती रही और अभी भी बिना किसी रुकावट के वहां पर कार्य चल ही रहा है ऐसे में उन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा है जिन्होंने अपने मकान का कार्य जनहित को देखकर स्वयं ही बंद कर दिया है। ऐसे में अपने मकान के आसपास मकान बनते देख इन लोगों को हैरान परेशान होना स्वभाविक ही है। लोगों का कहना है कि इस दिशा में सक्रियता के साथ कदम उठाए जाने की जरुरत है ताकि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उन्हें तो कम से कम से इस बात की शिकायत नहीं हो कि जो कार्रवाई की गई है वो पक्षपात पूर्ण रही है। देखना यह है कि आने वाले दिनों में किस प्रकार से कदम उठाए जाते है या फिर सब कुछ यूं ही चलते रहने दिया जाएगा।
एक बार फिर साबित किया भाजपा विधायक रमेश सक्सेना ने सीहोर जिले के सहकारी क्षेत्र में एक बार फिर अपनी दमदारी साबित करते हुए साफ कर दिया है कि सहकारी क्षेत्र में किसी भी दल के पास उनका कोई विकल्प नहीं है जो उनका मुकाबला कर सके। जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक अध्यक्ष पद पर विधायक रमेश सक्सेना की धर्मपत्नी श्रीमती उषा सक्सेना की नियुक्ति के बाद उनके समर्थकों के चेहरों पर खुशियां देखी गई। जिला सहकारी बैंक के प्रारंभ से ही विधायक रमेश सक्सेना का दबादबा कायम बना हुआ है।
पानी के लिए मशक्कत जैसे गर्मी अपने शबाव पर आती दिखाई दे रही है वैसे वैसे लोगों को पीने के पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि नपा द्वारा अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे है और वार्ड में भी पानी भिजवाने का कार्य टैंकरों के माध्यम से किया जा रहा है पर यह टैंकर पर्याप्त साबित नहीं हो रहे है लोगों को अभी भी पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए भटकना पड़ रहा है। आने वाले दिन भी गर्मी के लिहाज से काफी कष्टदायक रहेंगे ऐसे में व्यवस्थाओं पर सभी की निगाह रहेगी।

Sunday, May 15, 2011

शिक्षिकाएं सीखेंगी जूडो

सीहोर। इस बार गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद शिक्षिकाओं के हाथों में कलम तो होगी ही साथ ही साथ उनके कलम वाले हाथ छात्राओं को आत्म रक्षा के गुर भी सिखाएंगे, जिसके लिए पहले शिक्षिकाओं को विधिवत ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी, इस ट्रेनिंग के दौरान शिक्षिकाओं को जूडो, कराटे तथा ताईक्वांडो सिखाया जाएगा, शिक्षिकाएं यह ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद इसका प्रशिक्षण अपने-अपने स्कूल में पढऩे वाली छात्राओं को प्रदान करेगी जिससे वो अपनी आत्म रक्षा वो स्वयं कर सकेगी। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी अनुसार प्रदेश के सभी स्कूलों में अध्ययनरत् बालिकाओं को शारीरिक रुप से स्वस्थ्य और आत्मरक्षा के उद्ेश्य से शिक्षिकाओं को मास्टर रिसोर्स परसन उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम सीहोर में भी 18 मई से 27 मई तक आवासीय खेलकूद संस्था में आयोजित किया जा रहा है। जिसको लेकर विभाग द्वारा तैयारियां की जा रही है।
इस बार ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान शिक्षा विभाग के दिशा निर्देश में सभी स्कूलों की शिक्षिकाओं को आत्मरक्षा  के गुर सिखाने के उद्ेश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आवासीय स्कूल में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें शिक्षिकाओं को जूडो, कराटे तथा ताईक्वांडो का प्रशिक्षण बाहर से आने वाले प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया जाएगा। नौ दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षिकाओं को इस बात का भी प्रशिक्षण विशेष रुप से प्रदान किया जाएगा कि वो कैसे अपने स्कूल की छात्राओं को यह प्रशिक्षण प्रदान करे जिससे वो अपनी आत्म रक्षा कर सके। स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के परिपालन में विभाग द्वारा जोरदार तैयारियां की जा रही है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जाकर शिक्षिकाओं तथा शिक्षकों को दायित्व सौंपे जा रहे है। आत्मरक्षा अभियान के अंर्तगत किए जा रहे कार्यक्रम का लाभ कितना और किस प्रकार से मिलता है वो तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा पर इतना जरुर है कि यदि यह प्रशिक्षण पूूरी गंभीरता और लगन के साथ शिक्षिकाएं सीख लेती है तो छात्राओं को इसका लाभ जरुर मिल सकता है। परिणाम की चिंता किए बिना विभाग द्वारा तैयारियां की जा रही है।